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(as of Sep 10, 2026 00:25:10 UTC – Details)
‘कोहबर की शर्त’ एक ऐसा उपन्यास है, जिसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश के दो गाँवों—बलिहार और चौबे छपरा—का जनजीवन गहन संवेदना और आत्मीयता के साथ चित्रित हुआ है—एक रेखांकन की तरह, यथार्थ की आड़ी-तिरछी रेखाओं के बीच झाँकती-सी कोई छवि या आकृति। यह आकृति एक स्वप्न है। इसे दो युवा हृदयों ने सिरजा था। लेकिन एक पिछड़े हुए समाज और मूल्य-विरोधी व्यवस्था में ऐसा स्वप्न कैसे साकार हो? चन्दन के सामने ही उसके स्वप्न के चार टुकड़े—कुँवारी गुंजा, सुहागिन गुंजा, विधवा गुंजा और कफ़न ओढ़े गुंजा—हो जाते हैं। इतना सब झेलकर भी चन्दन यथार्थ की कठोर धरती पर पूरी दृढ़ता और विश्वास से खड़ा रहता है।
‘कोहबर की शर्त’ एक तरह से निराश और बरबाद ज़िन्दगी में एक नई प्रेरणा, नई स्फूर्त और नया उत्साह फूँकने की ही शर्त है, जिसका विस्तार इस मर्मस्पर्शी उपन्यास में सहज ही देखा जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि यह उपन्यास हिन्दी सिनेमा की दो चर्चित फ़िल्मों का आधार बना है : 1982 में हिरेन नाग द्वारा निर्देशित ‘नदिया के पार’ तथा हाल के वर्षों में बेहद लोकप्रिय रही ‘हम आपके हैं कौन।’






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